2 नवंबर 2019 - 14:54
लेबनान की वायु सीमा में इस्राईली ड्रोन, ...लेकिन इस समय क्यों? इस्राईली चीफ़ आफ़ आर्मी स्टाफ़ कई मोर्चों पर बहुत जल्द जंग छिड़ने

अरब जगत के जाने माने टीकाकार अब्दुल बारी अतवान का जायज़ाः हम लेबनान में होने वाले प्रदर्शनों की बात को थोड़ी देर के लिए रोकना चाहते हैं, इसलिए नहीं कि प्रदर्शनों की तीव्रता में कमी आई है और सेना ने सड़कों पर उतर कर वहां बनाई गई रुकावटें हटा दी हैं।

बल्कि इसलिए कि नया मुद्दा सामने आ गया है और वह यह है कि इस्राईल ने दक्षिणी लेबनान में नबतिया इलाक़े के पास एक ड्रोन भेजा जिसका लेबनान के रक्षा सिस्टम ने पता लगा लिया और उसे भागने पर मजबूर कर दिया।

यह पहली बार नहीं है कि इस्राईल ने लेबनान की वायु सीमा में ड्रोन विमान भेजा है लेकिन अंतर यह है कि पिछले तीन चार इस्राईली ड्रोन विमानों की तरह इसे गिराया नहीं गया।

इस्राईली सेना ने स्वीकार किया कि ड्रोन पर मिसाइल फ़ायर किया गया लेकिन वह ड्रोन को नहीं लगा जबकि हिज़्बुल्लाह के क़रीब माने जाने वाले अलमयादीन टीवी चैनल ने कहा कि मिसाइल ड्रोन पर लगा और वह गिर कर ध्वस्त हो गया।

दोनों बयानों में कौन सही है और कौन ग़लत यह तो अलग बहस है, सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि कई मोर्चों पर एक साथ तनाव बढ़ता जा रहा है। जो भी इन दिनों इस्राईली मीडिया पर नज़र डालेगा और इस्राईल के चीफ़ आफ़ आर्मी स्टाफ़ के बयान को देखेगा वह इस तनाव और इस्राईल में फैली चिंता को स्पष्ट रूप से महसूस कर लेगा। इस्राईली में पिछले रविवार से हाई एलर्ट जारी है।

इस्राईल के चीफ़ आफ़ आर्मी स्टाफ़ जनरल कूख़ाफ़ी ने एक साथ कई मोर्चों पर युद्ध शुरू हो जाने की बात की है। उनका कहना था कि उत्तर में हिज़्बुल्लाह के साथ, दक्षिण में हमास के साथ, पूरब में इराक़ी स्वयंसेवी फ़ोर्स हश्दुश्शअबी के साथ इसी तरह दक्षिण में यमन के साथ भी बहुत अधिक तनाव है। उनका कहना था कि लेबनान की सीमा पर फैली वर्तमान शांति बड़े तूफ़ान से पहले की शांति है।

कई राजनैतिक और सामरिक मुद्दे हैं जो इस गहरी चिंता का मुख्य कारण हो सकते हैं।

  1. ईरान की क्रान्ति के सुप्रीम लीडर सैयद अली ख़ामेनई का बयान है जिसमें उन्होंने कहा कि इराक़ और लेबनान में जारी वर्तमान प्रदर्शनों के पीछे अमरीका, इस्राईल और सऊदी अरब का हाथ है और उनके निशाने पर ईरान तथा वह इस्लामी प्रतिरोध मोर्चा है जिसका नेतृत्व ईरान कर रहा है। यही बात लेबनान में हिज़्बुल्लाह के सांसदों के बयान में भी कही गई है।
  2. दो महीने पहले सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर होने वाले मिसाइल और ड्रोन हमले ने साबित कर दिया कि यह मिसाइल कितने सटीक रूप से अपने लक्ष्य को ध्वस्त करते हैं। इससे पता चलता है कि ईरान की मिसाइल टेक्नालोजी कितनी आगे पहुंच चुकी है।
  3. बिनयामिन नेतनयाहू ने सोमवार को पहली बार चेतावनी दी कि ईरान यमन में मिसाइल लांचिंग पैड स्थापित कर रहा है जिनकी मदद से लाल सागर में केवल इस्राईली जहाज़ों को नहीं बल्कि इस्राईल के भीतरी इलाक़ो को निशाना बनाने की कोशिश की जाएगी।
  4. दिबका वेबसाइट ने इस्राईली इंटेलीजेन्स एजेंसियों से मिलने वाली जानकारियां प्रकाशित की हैं जिनसे यह पता चला है कि यदि इस्राईल ने दक्षिणी लेबनान के विरुद्ध कोई हमला किया तो ग़ज़्ज़ा पट्टी से तत्काल जवाबी हमला होगा, विशेष रूप से जेहादे इस्लामी संगठन की सैनिक शाखा की ओर से फ़ौरन इस्राईल पर हमला होगा जबकि इससे पहले तक यह नहीं होता था।
  5. सऊदी अरब के बक़ैक़ तेल प्रतिष्ठानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के समय अमरीकी वायु रक्षा व्यवस्था की ओर से कोई जवाबी कार्यवाही न होना और उससे पहले हुरमुज़ स्ट्रेट पर अमरीकी ड्रोन गिराए जाने पर भी अमरीका की ओर से कोई जवाबी हमला न होना, उत्तरी सीरिया से अमरीकी सैनिकों का बाहर निकलना और कुर्द घटकों को उनके हाल पर छोड़ देना वह घटनाएं हैं जिनसे इस्राईलियों में गहरा भय फैल गया है।
  6. फ़ार्स खाड़ी के इलाक़ों से अमरीका का लगभग अपने सभी युद्धपोतों को बाहर निकाल लेना, विशेष रूप से लिंकोलिन विमानवाहक पोत को बाहर निकालना जो इस समय हुरमुज़ स्ट्रेट से 800  किलोमीटर दूर अरब सागर में ठहरा हुआ है, यह सब कुछ ईरान की मिसाइल ताक़त से अमरीका और उसके घटकों में फैले भय की निशानी है।
  7. इस्राईली इंटेलीजेन्स एजेंसियों में यह विश्वास आम हो चुका है कि यदि ईरान के ठिकानों पर या ईरान के घटकों पर कोई हमला हुआ तो ईरान बड़ा कठोर जवाबी हमला करेगा। यही वजह है कि एक महीने से अधिक समय हो गया है कि इस्राईल सीरिया के भीतर किसी भी ईरानी ठिकाने को निशाना नहीं बना रहा है।
  8. इस्राईल ने फ़्रांस तथा अन्य यूरोपीय देशों से मांग की है कि वह लेबनान की ख़राब आर्थिक हालत में सुधार के लिए कोई भी आर्थिक मदद करने से पहले यह शर्त ज़रूर लगा दें कि हिज़्बुल्लाह मिसाइलों का निर्माण और ईरान से मिसाइलों की प्राप्ति बंद करे।

इस्राईली अधिकारी विशेष रूप से सैनिक अफ़सर यह बात मानने लगे हैं कि उनके सामने दुशमनों की लंबी सूचि तैयार हो गई हैं और सबका सामना उन्हें अकेले करना है। वह मानते हैं कि इस्राईल की सुरक्षा के लिए इस समय बहुत बड़ा ख़तरा पैदा हो गया है। इसके अलावा वह बहुत गंभीर राजनैतिक संकट में भी फंसे हुए हैं क्योंकि पांच महीने हो गए हैं और उनके पास कोई मज़बूत सरकार नहीं है।

इस बात की संभावना है कि नेतनयाहू ख़ुद को अदालत के चंगुल और भ्रष्टाचार के आरोपों से बचाने के लिए कोई उत्तेजक क़दम उठाएं। यह भी हो सकता है कि इराक़ और लेबनान में अपने घटकों पर हो रहे हमले पर अंकुश लगाने के लिए ईरान कोई कार्यवाही शुरू कर दे।

हमें सैयद हसन नसरुल्लाह के भाषण का इंतेज़ार है जिससे बहुत सारे मामले साफ़ हो जाएंगे इनमें लेबनान के प्रदर्शनों और भविष्य का मामला भी शामिल है, साथ ही पूरे इलाक़े की परिस्थितियों का विषय भी शामिल है। उनके भाषण से असली तसवीर सामने आएगी।